विद्यालय का उद्घाटन दिनांक-05 अगस्त 1978 (श्रावण मास 14 शक 1900) को तत्कालीन रेलमंत्री भारत सरकार प्रो0 मधु दण्डवते जी के कर कमलों द्वारा किया गया,जिसका मूल उद्देश्य रेलवे तथा आस-पास के गरीब बच्चों का सर्वागीर्ण विकास कम से कम शुल्क लेकर किया जा सके, सर्व प्रथम विद्यालय का शुभारम्भ कक्षा एक से जूनियर हाईस्कूल स्तर पर वर्ष 1983-84 तक संचालित किया गया इसके पश्चात् विद्यालय प्रशासन की अनुमति के साथ 1984-85 में हाईस्कूल की मान्यता हेतु प्रयास किया गया तथा 1985-86 में हाईस्कूल विज्ञान वर्ग की मान्यता प्राप्त हो गयी अभिभावकों की मांग को देखते हुए विद्यालय प्रशासन द्वारा वर्ष 2003-04 में इण्टरमीडिएट की मान्यता के प्रयास किया तथा वर्ष 2005-06 में विद्यालय इण्टरमीडिएट विज्ञान वर्ग (वित्तविहीन)में उच्चीकृत हो गया
इस कार्य में विद्यालय को जहां भी भूमि तथा भवन की आवश्यकता हुई प्रबन्ध समिति के साथ प्रधानाचार्य के प्रयासों से रेलवे महिला समिति एवं अनुसंधान अभिकल्प मानक संगठन (रेल मंत्रालय)मानक नगर लखनऊ के अधिकारियों एवं कर्मचारियो द्वारा विद्यालय को अविरल सहयोग दिया तथा यही नहीं वर्तमान समय में भी विद्यालय के रख-रखाव तथा कमरों के निमार्ण में अपना पूर्ण सहयोग दिया जा रहा है साथ विद्यालय के पूर्व प्रधानाचार्य तथा कुशल एवं प्रशिक्षित शिक्षक /शिक्षिकाओं के प्रयास से अग्रेत्तर शिक्षा के नये स्तम्भ स्थापित करने में सफल योगदान रहा है, जिसके परिणाम स्वरूप विद्यालय में समय-समय पर अध्ययनरत् रहे हाईस्कूल ,/इण्टरमीडिएट के छात्र/छात्राओं ने - उ0प्र0 माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा आयोजित बोर्ड की परीक्षाओं में सम्मान सहित उत्तीर्ण होकर प्रथम स्थान प्राप्त किया, जिनके नाम सम्मान पट्टिका में 1985-86 से अब तक स्पष्ट देखे जा सकते है साथ ही यह भी सत्य है कि विद्यालय ने अपने न्यूनतम संस्थानों से बच्चों को उच्च श्रेणी की शिक्षा देने का प्रयास किया.
इस विद्यालय का प्रधानाचार्य होना विशिष्ट सम्मान की बात है क्योकि यह एक ऐसा विद्यालय है जो पाठ्य सहगामी क्रियाओ एवं शारीरिक स्तर पर खेल में श्रेष्ठता रखते हुए निरन्तर उच्चतम मानक स्थापित करता है यह विद्यालय न केवल आदर्श नागरिक प्रदान करता है बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्र सेवा हेतु श्रेष्ठ प्रतिभाएं भी समर्पित करता है। संस्था प्रमुख होने के कारण मैं ऐसा विश्वास करता हूँ कि जीवन के सभी पक्षों के उद्देश्य प्राप्ति हेतु विद्यार्थियों में केवल ज्ञान बल्कि उच्च चरित्र का होना भी अनिवार्य है
मैं सौभाग्यशाली हूँ कि मेरे साथ एक अनुभवी और कर्मठ शिक्षक समूह है जिसकी वजह से विद्यालय आज वर्तमान स्तर पर पंहुचा है। मैं अपने कर्मठ एवं कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारियों के साथ दृढ प्रतिज्ञा करता हूँ मैं विद्यालय के विकास के लिए मजबूत नींव को और सुदृढ करते हुए क्षितिज तक ले जाऊंगा। मेरा उद्देश्य न केवल योग्य प्रशासक बनना है बल्कि एक मित्र, दार्शिनिक और एक विद्यार्थी के लिए एक मार्गदर्शक बनना भी है। विद्यार्थियों और अभिभावकों के सु भाव व मार्ग दर्शन का सदैव स्वागत करता है।
धन्यवाद
प्रधानाचार्य